Monday, April 23, 2018

रात ढले बहुत देर तलक जगाती है..


रह रहकर वो गूँज कहाँ से आती है,
रात ढले बहुत देर तलक जगाती है,
काले साए जैसे सिरहाने बैठे हो,
मुझपर ही बस ताक लगाए बैठे हो,
जब भी ज़रा सी ऊँघने लगती हैं सांसें,
पलकों को मूंदें जब ख़ाब मैं बुनती हूँ,
तुमको सोचूं, तुमको देखूं, और पाऊं,
फ़िर उन्ही नज़्मों को एक बार मैं दोहराऊं,
माज़ी के सफहों पर जब पाँव मैं धरती हूँ,
जाने कहाँ से गूँज वो फ़िर से आती है,
रात ढले बहुत देर तलक जगाती है..
....निरुपमा (23.4.18)

Tuesday, March 20, 2018

बाबूजी

ज़िन्दगी की कुछ सच्चाई कभी बदल नहीं सकती! ये हम सब जानते हैं, लेकिन उन् सच्चाइयों को स्वीकार करना शायद इतना आसान नहीं होता!


जाते जाते, मुझसे एक बात कही थी आपने,
कहा था 'मैं लौट के आऊंगा एक दिन,
साथ ही खेल खिलोने लाऊंगा उस दिन,

आप जब साथ थे तो सबकुछ कितना अच्छा था,
माँ भी खुश थी और सारा जग सच्चा था,

कितनी रातों को आप जागे थे हमारे लिए,
कितने ही साल छोड़ आए थे हमारे लिए,

गुज़रे दिन और गुज़र गयीं शामें भी,
अब तो लगता है जैसे गुज़र गयीं हो सदियाँ ही,

आपका चेहरा अब भी याद  हमें आता है,
आज भी पिछले पहर देर तलक रुलाता है,

माँ के चेहरे को उदासियों ने ऐसे घेरा है,
जैसे सावन पर अब पतझड़ों का बसेरा है

अब तो गुडिया की और खिलोनो की न चाह बची,
सूनी आँखों में बस आपकी तस्वीर थमी,

काश एक बार फिर से बाबूजी आप आ जाएं,
सूने घर को फिर से रोशन कर जाएं...

Friday, March 16, 2018

निभा सको ...तो चलो....


सुनो,
मुझसे दूर से ही बात होगी,
बस ख़ाबों में मुलाक़ात होगी,
मेरा आँचल, मेरी आँखें, मेरी बेबाक अदा,
मेरा काजल, मेरी जुल्फें जैसे घनघोर घटा,
इन घटाओं से तुम्हे दूर ही रहना होगा,
दिल कभी मचले.. तुम्हे फिर भी संभलना होगा,
मुझसे मेरे दोस्त कभी कुछ भी न तुम पाओगे,
आज कहते हो, मेरे बिन न तुम रह पाओगे,
वक़्त के साथ हर एक रिश्ता टूट जाता है,
साथ चलते हुए हर साथ छूट जाता है,
तुम जो कहते हो, हर शर्त तुम निभाओगे,
मेरी खातिर हर रस्म तुम उठाओगे,
मैं जानती हूँ तुम कुछ भी न कर पाओगे,
और एक रोज़ जान तुम भी बदल जाओगे….

Monday, March 12, 2018

प्यार इश्क मोहब्बत.....


"प्यार इश्क मोहब्बत,
हालत की पैदाइश है और
हालात के आगे ही दम तोड़ देते हैं...."

हैराँ

मैं खुद ही हैराँ हूँ अपने बदले हुए अंदाज़ से,
मैं खुद ही परेशाँ हूँ अपने हर एक अंजाम से,
जाने कैसे बदल गई ये शक्सियत मेरी,
कोई मुझसे क्या कहे ‘आप तो ऐसे न थे

Saturday, March 3, 2018

बस यूँ ही


तेरे चेहरे की रौनक, आँखों की मुस्कान,
हाथों की लकीरें, हम मिलाते थे तकदीरें,
वो कोमल उंगलियाँ, तुम्हारे पाँव का स्पर्ष,
तुम्हारे होंठों पर वो हलकी सी हंसी,
सांवले से चेहरे पर दो बड़ी आँखें,
वो बेपनाह मुहब्बत के दावे,
वो कभी न बिछड़ने के वादे,
तुझसे वफ़ा करते करते,
तेरे साथ चलते चलते,
नन्हा सा प्यार पनपा था कभी,
आज उसी प्यार की डली लेकर,
तेरे वास्ते हर ख़ुशी लेकर,
देखो मैं फिर से लौट आई हूँ,
हर रस्म दुनियाँ की तोड़ आई हूँ..
तुम भी एक बार मुर के देखो न,
तुम मेरे हो सिर्फ़ मेरे हो,
सिर्फ़ एक बार मुझसे कह दो न...

Saturday, February 24, 2018

इश्क की इन्तहाँ....

इश्क की इन्तहाँ..मालूम नहीं,
इश्क क्या है..मालूम नहीं,
बस एक ही ख्वाब देखा है इन आँखों ने,
मैं तुम्हारे साथ बूढ़ी होना चाहती हूँ,
और तुमसे ठीक एक रोज़ पहले,
इस दुनिया से रुखसत होना चाहती हूँ....

इंशाअल्लाह ...आमीन 

Wednesday, February 14, 2018

‘प्यार’-एक्सपायरी डेट


साल दर साल गुज़रते रहे,
वक़्त…...परत दर परत चढ़ाता रहा,
तुम्हे याद करना..मेरी आदत बन गयी,
तुम्हे सोचना...मेरी फ़ितरत,
हर कसमें, हर वादे तुम भूल गए,
सिर्फ़ एक फ़ैसला तुम्हारा, सब ख़त्म कर गया,
उन तीन शब्दों को सहारा मानकर,
मैं चलती रही, गिरती रही, संभलती रही,
मैं गुज़रे कल में जीती रही, और तुम…… आज में,
क्या प्यार भी एक्सपायरी डेट के साथ पैदा होता है जाना’?

Wednesday, January 24, 2018

जाना है, कहीं दूर बहोत दूर मुझे जाना है....

जाना है, कहीं दूर बहोत दूर मुझे जाना है....
छुट्टियां हर उस शख्स से जो मेरे आसपास है,
छुट्टियां हर उस वक़्त से...जो गुज़रता ही नहीं,
दर्द है, फ़रियाद है, गुम हुई आवाज़ है,
मेरा अपना कुछ भी नहीं..बस माज़ी मेरे पास है,
जाना है कुछ इस तरह, के लौटने की तारीख नहीं,
हर पल हर दिन लहरों के साथ बहना है,
चाँद के साथ निकलना और सूरज के साथ डूबना है,
देखना है बहोत देर तलक पंछियों को चहचहाते हुए,
देखना है उस माली को फूलों से काटें निकालते हुए,
मुझे अब और नहीं रहना इस शहर में,
सब बहरूपिये हैं, एक शक्ल पर कई शक्लें लगा रक्खी हैं....

जाना है, कहीं दूर बहोत दूर मुझे जाना है....

Tuesday, January 16, 2018

प्यार

सबकुछ अपना ही है?
कुछ बदला तो नहीं!
उसकी आवाज़ में एक अनजानापन,
उसकी आँखों में वो बेरुखी,
उसके होठों पर किसी और का ज़िक्र,
फिर भी कहता है, मुझको तुमसे प्यार है

उसकी आवाज़ से दिल और धडकता नहीं मेरा,
उसके इंतज़ार में, बेचैनी मेरी और बढ़ती नहीं,
मेरी आँखों में ख्वाब तो अब भी आते हैं,
पर खवाबों में वो आता नहीं,
न हैरत होती है मुझे उसके बेगानेपन से,
न नज़रे झुकती है मेरी, उसके अब छुअन से,

फिर भी कहती हूँ, मुझको तुमसे प्यार है

https://www.youtube.com/watch?v=eIQRdimcqrw