Wednesday, April 27, 2011

चंद पन्ने

छेड़ के मुझको तेरा वो मुस्कुराना,
याद आता है किस्सा एक पुराना,
तेरी एक मुस्कान मेरे होश उडाती थी,
तेरी नज़रें मुझसे जब ये फरमाती थी,
तेरे पहलू में मुझे ये जहान मिलता है..
सच कहूँ मुझको सब..यहाँ मिलता है,
एक आँचल जो तेरा मेरे हाथों में आता है,
इसी धरती पे मुझको आसमां मिलता है
वो आँचल आज भी बेसहारे हैं,
कैसे कहें जीवन कैसे गुज़ारे हैं,
तेरी ही याद के अब तो बस सहारे हैं,
हाथ आये जो हमारे वो महज़..........
चंद पन्ने पुराने हैं,

तुम

तुम्ही से सीखा मैंने मुस्कुराना,
तुम्ही से जाना है दिल  का लगाना,
तुम्हे माना है अपना सीर्फ अपना,
तुम्ही से पूरा हुआ मेरा हर एक सपना,



Tuesday, April 26, 2011

परेशां

वो यादें दफन कर दो, मुझे बस अब तो जाने दो,
परेशां हूँ बहुत मैं कुछ दिनों से,

तुम्ही ने शाम के तारों को तोडा,
तुम्ही ने रात का आँचल हटाया,
मेरे जीवन में फैला है अँधेरा
मुझे वीरानियों में अब तो रहने दो,
परेशां हूँ बहुत मैं कुछ दिनों से,


Thursday, April 21, 2011

नज़ारा

दास्ताँ-इ-इश्क हम सुनाएंगे आज,
तुमको अपना हम बनायेंगे आज,
अपनी नज़रों में मेरी तस्वीर पाओगे,
तुम्हे वो नज़ारा दिखायेंगे आज!

खेला यूँ नहीं करते

किसी की याद ज़ाया यूँ नहीं करते,
किसी के इश्क की चर्चा यूँ नहीं करते,
बड़े नाज़ुक होते हैं ये रिश्ते जनाब,
किसी के दिल से खेला यूँ नहीं करते!

पुरानी पोटली

पुरानी पोटली में कुछ सामान मिला है,
कुछ अनकही बातें मिली हैं,
कुछ अनबुझी यादें मिली हैं,
एक धूप से सफ़ेद कागज़ पर तेरा नाम मिला है,
एक तस्वीर मिली है कुछ जानी पहचानी सी है,
शायद उस सपने की है, जो हमने साथ देखी थी!
गुज़रे लम्हों की अनगिनत यादें समेटकर,
एक लिफ़ाफ़े पर तुम्हारा नाम लिखकर,
तुम्हारे दर पे छोड़ जाउंगी,
गर आये मेरी याद तो मुझे बुलाना,
गर लगे एक चुभता सपना तो बेशक भुला देना…

Wednesday, April 13, 2011

तेरा साथ

एक छोटा सा लम्हा चुरा के ले गए थे तुम,
मेरे इस जहान में अब तक अँधेरा है,
मुझे भी रौशनी का एक टुकड़ा मिल जाए,
मेरी भी सांस पूरी हो, गर तेरा साथ मिल जाए!

एक छोटा सा पल

एक छोटा सा पल अटका हुआ है साँसों में,
एक छोटा सा पल, गुजरता नहीं है सदियों से,
कुछ पल एक और बार मेरे नाम हो जाये,
मेरी सुबहें तुमसे और तुम्ही से शाम हो जाए,
फिर पलों को गुन्थो तुम, मेरी चोटी में,
फिर यादें फेंको तुम, मेरे इस दामन में,
दो पल का साथ तुम्हारा, मेरे सारे सपने सच कर देगा,
मेरी वीरानी में एक ख़ास रंग भर देगा!

Monday, April 11, 2011

याद

कुछ अनकही बातें, कुछ अनबुझे से पल,
कुछ धुंदली तस्वीरें यूँही याद आ गयी,
कुछ ख्वाबों का मजमा लगा,
एक ख्वाब ने यूँही जब गुदगुदाया,
तेरे चेहरे की मुस्कान यूँही याद आ गयी,
कई सदियाँ, पल में गुजारी थी,
कई लम्हे हमने चुराए थे,
वो लम्हे वो पल यूँही याद आ गए,  



Friday, April 8, 2011

चाँद

कल रात चाँद देखा था तुमने? मैंने देखा था ............
बहुत उदास बहुत तन्हा था वो,
उसकी शक्ल कुछ यूँ लग रही थी जैसे ...
जैसे सालों से उसने रौशनी का सामना ही न किया हो...
अँधेरे में खुद में सिमटा हुआ सा खड़ा था वो
जब मैंने उसकी ओर देखा ..तो मेरी ओर खीचा  सा आया था वो ...
शायद कुछ कहना चाहता था...शायद कोई पैगाम किसी खास के लिए देना चाहता था!!!!
हाँ अपने उस एहसास को शायद  वो उस तक  पहोचाना चाहता था .. जो उसकी ज़िन्दगी था....
या शायद उसके इस अँधेरे वजूद की वजह!

आज फिर आएगा वो कह कर गया था कल मुझे!....हो सके तो तुम  कुछ करना!!!
वो कहते हैं न किसी को अँधेरे से निकालो तो रौशनी की एक किरण हमपर भी पड़ती है!!!

Monday, April 4, 2011

सपने

आओ एक चाँद तोड़ के लाते हैं,
दोनों मिलके साथ, कुछ सपने सजाते हैं,
तुम मेरी बांह में कुछ तारे भरना,
और मेरे सामने कुछ ग़ज़लें पढ़ना,
मुझे कुछ और यादें बनानी हैं,
तुम सीर्फ अपनी ख्वाहिशें कहना,
मेरी ज़िन्दगी को मायने मिल जायेंगे,
यकीं मानो सारे सपने सच हो जायेंगे!!

साथ

एक लम्बी सी रात में, तारों की बात हो,
कुछ और हो ना हो, बस तुम मेरे साथ हो,
खामोशी की दास्ताँ सुनेंगे हम,
अनकही हर बात कहेंगे हम,
हौसला तुमने जो दिया मेरे हमसफ़र,
उस चाँद को भी ज़मीन पे लायेंगे हम!

Friday, April 1, 2011

नमी

ये आँखें नम क्यूँ हुई, किसी की याद आई क्या!!
तेरी तस्वीर महज़ मैंने सीने से लगायी थी!