Monday, November 19, 2012

क्या है ये ज़िन्दगी, क्या हैं ये रिश्ते

कुछ भी तो नहीं हुआ ,
कुछ भी तो नहीं
फिर ये अचानक मेरी आँखों के कोरों से आंसू क्यूँ छलक गए!

‘मैडम आपके लिए किसी का मेरेज कार्ड है’, पोस्टमैन ने कार्ड थमाते हुए आरती से कहा, आरती के हाथ में कार्ड आया ही था के फ़ोन की घंटी बज गयी, ‘तुम्हे कार्ड मिला? ’फ़ोन पर आकाश था, ‘जरा ठहरो, आरती बस इतना ही कह सकी, सवाल सुनते ही आरती का दिल बैठ गया, वो चुप थी, आरती ने एन्वेलप खोला और पढ़ना शुरू किया, आकाश ने खुद अपनी शादी का इनविटेशन कार्ड तैयार किया था, वो पढ़ती जा रही थी और उसका दिल बैठा जा रहा था, पढ़ने के बाद उसने आकाश से बस इतना ही कहा ‘खुश रहो हमेशा, मेरी दुआ तुम्हारे साथ है!’...........उसे मालूम भी न चला कब उसके आँख से आंसू छलक पड़े! एक पल पहले तक वो सोच रही थी के वो आकाश को भूल गई है, उसकी शादी होने वाली है ये तो वो पहले से जानती थी, ‘हाँ यही तो वो वजह थी के उसने खुद को आकाश से दूर कर लिया था, उसने तो बस इतना ही चाहा था के आकाश अपनी ज़िन्दगी के हर रंग देखे, खुश रहे, और जिस से भी उसकी शादी हो उस लड़की से उसे भरपूर प्रेम मिले, ‘मैं तो हमेशा से यही चाहती थी के आकाश की ज़िन्दगी खुशहाल रहे, उसे वो सारी  खुशियाँ मिले जिसका वो हक़दार है! फिर आज ये आंसू क्यूँ?, आरती अनगिनत सवालों में उलझ गयी!
 
दोनों में गहरी दोस्ती थी, पर आकाश आरती से प्यार करता था, जो उसने बहोत देर से बताया, हाँ आरती की शादी हो जाने के बाद, वो जनता था के ये शादी, शादी नहीं एक समझौता मात्र है! खुद को उसने रोका भी नहीं, हर मुमकिन कोशिश करता आरती को खुश रखने की, पर वो अपनी ज़िन्दगी में उलझी रहती जो एक स्याह रात के सिवाय कुछ न थी! आरती की ज़िन्दगी एक शाम की तरह थी, एक ऐसी शाम के जिसके बाद रात होना निश्चित है! सारा सच जानने के बावजूद आकाश उससे प्यार करता था, ऐसा वो कहता था, आकाश को आरती की आवाज़ में दर्द की एक झलक भी दिखती तो तड़प उठता, और उसे हंसाने की हर मुमकिन कोशिश करता, लेकिन ख़ुशी बस कुछ पल की होती, आरती फिर लौट आती उसी गहरी शाम के साए में जहाँ से समझौते का सफ़र शुरू होता! ‘आरती बस एक बार कह दो क्या तुम्हे एक पल को भी मुझसे प्यार हुआ है?’ इस सवाल का जवाब दे पाना आरती के लिए आसन न था, वो कहती, ‘हाँ, पर बस एक दोस्त की तरह!’ आरती जितनी भावुक लड़की थी उतनी ही सच्चाई का सामना करनेवाली भी, वो सच जानती थी, वो इस बात को जानती थी के आकाश एक आम इंसान है, वो प्यार तो कर सकता है पर समाज के बनाए बंधनों को तोड़ने की हिम्मत नहीं, शायद यही वो वजह थी के वो कभी खुल के अपने मन की बात न कह सकी! वो जानती थी के आकाश जबतक उस से दूर न जाएगा वो अपनी ज़िन्दगी में आगे नहीं पढ़ पाएगा, सीर्फ इसीलिए उसने खुद को आकाश की नज़रों में गिराने का फैसला किया! और कामयाब भी हो गयी! आकाश का दिल टूट गया और उसने आरती को हिकारत की नज़रों से देखा, आरती सब सहती रही, एक दिन हार कर आकाश ने आरती से हर ताल्लुक तोड़ लिए, कई महीने गुज़र गए दोनों में कोई बातचीत न हुई, पर आज? जाने क्यूँ आरती को ये बात चुभी थी के जो शक्स मुझसे प्यार करने के दावे किया करता था, उसकी शादी है ये तो मालूम है, पर ऐसा कैसे हो सका के उसने  इतने शौक से अपनी शादी का कार्ड डिज़ाइन किया?

क्या वजह थी के आकाश ने इतने दिनों बाद आरती से बात करने की कोशिश की? क्या वो उसे भूला नहीं था?
क्या वजह थी के आकाश ने वो इनविटेशन कार्ड आरती को भेजा ? क्या वो आरती के मन की थाह लेना चाहता था?
क्या वजह थी के आरती ने जब खुद को पूरी तरह इस रिश्ते से काट लिया था फिर भी आकाश के कार्ड को देख उसकी सांस सीने में अटक गयी? क्या उसे आकाश का इंतज़ार था?

कितनी अजीब बात है न, जो हमसे प्यार करे हम उसके होते भी नहीं, और उसपर अपना हक भी समझते हैं, समझदारी कहती है के शादी आँखें खोल के करनी चाहिए, जीवन का बहोत अहम् फैसला है, और मन कहता है, के उसने अपनी आँखें खोल, सबकुछ खंगाल कर कदम उठाया?

क्या है ये ज़िन्दगी, क्या हैं ये रिश्ते,
कभी खुशियों से सराबोर करते हैं, कभी आपस में उलझते!

3 comments:

  1. bilkul kya zindagi aur kya riste ...zindagi aur risto ka ek chor to hain par inka ant kaha hain kisi ko pata nahi ..........

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    1. इसके अंत को जानने की व्याकुलता हमें जीतेजी जीने नहीं देती...और जब मौत आती है तो आसानी से मरने नहीं देती....

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