Monday, August 11, 2014

हम......तुम

हसरतें... जो दिल मे ही रह गयी,
ख़याल... जो ज़हन से निकल न सके,
हम... जो आज भी हैराँ हैं तेरे जाने से,
और तुम... जो लौटकर फ़िर आ न सके।

ख़्वाब जो बारहाँ उगते रहे, पलते रहे,
फ़िर रहरहकर अपनी ही ड्योढी पर दम थोड़ते रहे,
हम.. जो हसरतों के सफ़हे बस यूंही पलटते रहे,
तुम...जो ख़्वाबों में भी हमसे मुह मोऱते रहे।

1 comment:

  1. बहुत खूब ... दिल का एक ख्याल ...

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