Wednesday, March 18, 2015

बस यूँ ही.....

1.
“हज़ारों ख्वाब देख डाले मेरी आँखों ने, 
उस रोज़ जब तूने कहा,

‘मैं फिर आऊंगा’”

2.
"अधूरे ख्वाबों की दहलीज़ पर खड़ा,
आज भी मेरी राह तकता होगा,
दिन की सुध होगी कहाँ उसको,
रात भी जागते काटता होगा,

नर्म होठों की सलवटें, चाँद आँखों की शिक़न,
दर्द में डूबी वो आहें, रात भर मुझको पुकारती होंगी,
आज भी उसकी दो निगाहें,
बेवजह मुझको तलाशती होंगी...."

Tuesday, March 3, 2015

चलो खामोशी की सब दीवार तोड़ते हैं........

चलो खामोशी की सब दीवार तोड़ते हैं,
तुम हमसे कहो, हम तुमसे बोलते हैं,
दिल से ज़ख्म, ज़ख्म से दर्द का सफ़र बहुत हुआ,
आज मरहम की कुछ बात बोलते हैं,
तुम हमसे कहो, हम तुमसे बोलते हैं,
चलो खामोशी की सब दीवार तोड़ते हैं...

सूना है दिल के ज़ख्म यूँ भरा नहीं करते,
ग़म की रात में, ख्वाब बुना नहीं करते,
पाँव में बेड़ी हो, होठों पर ताले,
तो नए रिश्ते यूँही चुना नहीं करते,

स्याह रातों का सफ़र बहुत हुआ,
बंद दरवाज़ों का, खामोश आवाजों का,
तनहा ज़िन्दगी का सफ़र बहुत हुआ,
आज माजी की हर परत खोलते हैं,
तुम हमसे कहो, हम तुमसे बोलते हैं,

चलो खामोशी की सब दीवार तोड़ते हैं...

माज़ी के सफ़हे...

मुझे अंदाजा न था शेखर कि तुम्हारे जाने से मेरी ज़िन्दगी तार तार हो जाएगी, मुझमें जीने की उम्मीद न रहेगी, मरने का हौसला न रहेगा, हंसूंगी तो कुछ इस तरह कि जैसे एहसान किये जाती हूँ खुद पर, रोउंगी तो गले से आवाज़ न निकलेगी, सोचूंगी तो पहरों माजी में तफरीह करती रहूंगी, और लौटना चाहूँ भी तो लौट न सकुंगी, कि तुम सामने तो होगे, पर तुम मेरे ना होगे...सच कहूँ तो तुम्हारी चाँदनी में अब हौसला नहीं कि लड़ सके इस जहां से, लोगों की तंज निगाहों को सह सके, सुन सके गालियाँ, और फिर भी रखें उम्मीद को जिंदा कि एक दिन तुम मेरे होओगे, एक दिन हम साथ होंगे, याद है शेखर शादी के बाद जब मैंने तुमसे बेटे की मांग की थी, तो तुमने क्या कहा था? तुमने हँसते हुए कहा था कि “चाँद, ये शादी अभी दुनिया के सामने नहीं आयी, अभी से ये ख्यालों के महल बनाना शुरू न करो, तो मैंने कहा था, मैं तुम्हारे लिए इस दुनिया से लड़ सकती हूँ, कि मेरी दुनिया सिर्फ तुमसे है....तुमने हर बार की तरह सिर्फ मुस्कुरा भर दिया था, और छोड़ गए थे मेरे चेहरे पर अपनी दो आँखें, वो शरारती आँखें, जिनके आगे भी कुछ है, मैंने कभी सोचा ही नहीं..........