Wednesday, September 21, 2016

उम्मीद

दर्द तो दिल में था,
ये आँख मेरी भर आई क्यूँ,
मुद्दतें गुजरी अब तो,

न वो आया न उम्मीद गईं

Monday, September 19, 2016

यूँही

"आँख में आंसू,
आंसुओं में नमक चक्खा था,
और कुछ बूँद, ख़ाबों का लब पे रखा था,
उन्ही ख़ाबों से फ़ासला तूने बनाया क्यूँ,

ख़ाब तो ख़ाब थे कह इनको आज़माया क्यूँ...."