Tuesday, January 10, 2017

बस यूँही..

बन गया बहाना ‘तेरी बेरुखी’

वरना रोने को कबसे बेकरार थे हम...

3 comments:

  1. रुलाने वाले आखिर हमे रुला देंगे,
    ज़हर देके गहरी नींद में सुला देंगे,
    फिर भी कोई गम न होगा हमे,
    दर्द तो तब होगा जब आप हमे भुला देंग़े।

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    1. भूल पाना जो अपने बस में होता, भूल जाते लोग पहले अपने माज़ी को....

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