Tuesday, July 4, 2017

बदला कुछ है शायद हमारे दरमियाँ .....

कितना अजीब वो पल होता है न ..
जब दिल में अनगिनत बातें भरी हो..और जुबां खामोश हो,
वो  पल कितना भारी होता है,
जब होंठ तो हिले, पर शब्द बेज़ुबान हो जाए,
आँखों में उम्मीदें हो, और कान सुनने को तरसते हो जिसकी आवाज़,
उसी से बात करते-करते, उसी की बात सुनते-सुनते,
बस अचानक ही लगे,
कि “अब कुछ मत कहो...शायद और सुन ना पाऊं...”
जिसे पाने की आरज़ू ताउम्र खुद में लिए फिरते हैं,
जिसकी सूरत, हर सूरत में तलाश करते हैं,
जिसकी खामोशी भी एक गूँज बनकर, कहीं कानों में बसा करती है,
उसी के साथ चलते चलते, कभी ऐसा भी होता है,
कि वो तो होता है...पर वो कहीं नहीं होता...


No comments:

Post a Comment